
मेरे सपने और मैं
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July 3, 2014
अटखेलियां खेलता बहुत ललचाता, कभी मैं उसे छेड़ती कभी वो मुझे छेड़ता। दामन हाथ मैं आते ही फिसलता, कभी आंसूं कभी हौसला देता। कभी पास होता कभी पहुंच से बहार, यही रिश्ता है हमारा। न मैं उसे छोड़ती न वो मुझे ...Read More
