Shishu Bodh

Shishu Bodh

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शिशु बोध

अनन्या के मुख का भाव बदला
माँ बनने का बोध दुनिया की सबसे बड़ी ख़ुशी थी उसने जान लिया

 

शिशु की किलकारी उसके कानों से न छूटती
बार बार अपने आमाशय पर हाथ फेरती

 

पता था कि अब तक जीव जागृत हुआ तक न होगा
पर हर बार फेरे हुए हाथ को चूमा

 

जीवन का मानो बदल गया उद्देश्य
अब कोई कमी न रही शेष

 

“अनन्या, हम इसे नहीं दे सकते जन्म।”
“क्यों नहीं ?” कहा उसे आँखें नम”

 

बस कह दिया। हर सवाल का जवाब होता नहीं। “
विशन मुख, सख्त आँखें, मौन कर वह चली

 

बयाँ करना चाहती थी वह पहली बार कि ख़ुशी
पर सुख की बरसात को दुःख का लबादा पहना कर छिप गयी

 

दवा पीने से पहले, वहीँ फेर फिर से हाथ
मेरी इच्छा मेरी नहीं, तू नहीं यहां किसीको स्वीकार

 

कहके पिया उसने गूंठ दवा  का
बस यही तक का साथ था उसके मातृत्व का
Image Source: Save Girl Child
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