
शृंगार (Beauty)
शृंगार (Beauty) “मेरे सामने श्रुंगार करो” था उसका अनुरोध उस बात पे रंग गयी, फिर रहा न कोई बोध। मेरी ख़ुशी कि न थी कोई सीमा उसको सौंपी थी अपनी ज़िंदगी और अपनी गरिमा। पायल, झुमके और हार पहना उसकी पसंद से पर वो ...Read More








