Poetry Archive

शृंगार (Beauty)

शृंगार (Beauty) “मेरे सामने श्रुंगार करो” था उसका अनुरोध उस बात पे रंग गयी, फिर रहा न कोई बोध। मेरी ख़ुशी कि न थी कोई सीमा उसको सौंपी थी अपनी ज़िंदगी और अपनी गरिमा। पायल, झुमके और हार पहना उसकी पसंद से पर वो ...Read More

Shishu Bodh

  शिशु बोध अनन्या के मुख का भाव बदला माँ बनने का बोध दुनिया की सबसे बड़ी ख़ुशी थी उसने जान लिया   शिशु की किलकारी उसके कानों से न छूटती बार बार अपने आमाशय पर हाथ फेरती   पता था कि अब तक ...Read More

Benam Rishtey (बेनाम रिश्ते)

              दिल टूटा धड़कने बिखरी आँखें भीगी सिसकियाँ भारी कापे हाथ ज़बान लड़खड़ाई मन कमज़ोर पैर कपकपए नज़ेरें मिली उससे धृषय ढूँडलसा पर कहीं ना कहीं हौसला देता सा वो हसा दर्द से वो भी मुस्कुराइ दुख च्छुपाए ...Read More

Our Abode

  Large wooden door stared at me, The brown floor, the yellow walls, I wanted to flee.   Giggles, whispers and the moans, Reminded of the time alone.   Entered the room I heard them louder, Saw the mirror where we stood together.   ...Read More

Heartless!

            Happiness was her name, Merryland she dwelled Born as a princess to parents Gratitude and Faith It was her birthday 16th they gifted her wings feathered White as snow, she flapped them with joy unmeasured Wings would protect till ...Read More

मौन ही मेरी चीख है !

दर्द से जी चीख उठा वह लम्हा जब याद आया।तेरे शब्दों से बिखरी थी जब कोई और किनारा न मिला तब। उसी वक़्त आँखें मूंदी सब्र की दीवार फिर से टूटी। एक हाथ बढ़ा आश्रय देने बुने रिश्तों के ताने बाने। दिल ने ढूंढा ...Read More

मेरे सपने और मैं

    अटखेलियां खेलता बहुत  ललचाता, कभी मैं उसे छेड़ती कभी वो मुझे छेड़ता।    दामन हाथ मैं आते ही फिसलता, कभी आंसूं कभी हौसला देता।   कभी पास होता कभी पहुंच से बहार,  यही रिश्ता है हमारा। न मैं उसे छोड़ती न वो मुझे ...Read More