वक़्त और दुनिया से परे !

आपका हाथ मेरे हाथों में है
अब कहाँ परवाह मुझे दुनिया की !

ज़िन्दगी तुम मेरी हो
तुम्ही लाते हो ताज़गी।

साथ जब तुम हो कहाँ हूँ मैं अपने आप की
तुम्हारे प्यार ने बिखरी हरयाली मुज बंजर पर
अब तोह बस एक ही मक़सद, एक ही दुआ, मिलने की।

सब्दों से हुआ सिलसिला शुरू, कभी न होगा ख़त्म ये
प्यार ही प्यार बेशुमार, जैसे हो वक़्त और दुनिया से परे ।

हर खत बुनता सपने, कर लब्ज़ बिखेरता चाह
कारवां कभी ख़त्म न हो, यही है मंशा आपकी।

इक न्यूनता से गुज़रे दोनों, बस शुन्य ही था पास
भरा है दोनों से जीवन, सब कुछ हो गया है ख़ास।

तामीर किया है अपना जीवन बस आपके साथ
हर मुश्किल, ख़ुशी हो या ग़म अब गुज़रे हाथों में हाथ।

 

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